बंगाल में विकास का मिथ : दावों की असलियत

May 15, 2007

दावे उतने सच भी नहीं
रेयाज-उल-हक /सुष्मिता गोस्वामी

नंदीग्राम नरसंहार को जायज ठहराने का बंगाल सरकार ने एक आसान रास्ता अपनाया था, यह दावा करके कि राज्य में कृषि का विकास इस हद तक हो चुका है कि अब वहां औद्योगिक विकास ही एक मात्र रास्ता बचता है. कृषि से जो अतिरिक्त आय हो रही है और जो अतिरिक्त रोजगार पैदा हुआ है, उसकी खपत उद्योगों में ही हो सकती है और इसीलिए उद्योग इतने जरूरी हैं. सरकार वहां जो कर रही है वह ठीक -ठीक यही है और उसका विरोध कर रही शक्तियां दर असल समाज को पीछे ले जाना चाहती हैं. मगर वास्तव में यह जितना आसान रास्ता था उतना ही क मजोर भी. खुद आंकड़े सीपीएम के दावों पर सवाल उठाते हैं. माकपा पश्चिम बंगाल में कृषि विकास के दावे करती नहीं थकती. लेकिन कृषि से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में इस क्षेत्र में स्थिति भारत से बहुत अलग नहीं है. 1971 से 1981 एवं 1981 से 1991 में भूमिहीन किसानों की वृद्धि दर जमीनवाले किसानों के आंकड़े को भी पार कर गयी. दूसरी तरफ सीमांत किसानों की प्रतिशतता में वृद्धि हुई है. मध्यम एवं छोटे किसानों की संख्या में गिरावट आयी है. छह अक्टूबर, 2005 का गणशक्ति (सीपीएम के बांग्ला मुखपत्र) में कहा गया है कि कृषि के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद इसके विकास का बहुत छोटा हिस्सा भी खेत मजदूरों तक नहीं पहुंचा है. अनुसूचित जाति/जनजातियों एवं अन्य पिछड़ी जातियों से आनेवाले मजदूर सामाजिक व आर्थिक दोनों रूप से पिछड़ रहे हैं. 2001 की जनगणना के अनुसार पश्चिम बंगाल में किसानों की कुल संख्या 129.64 लाख थी. इस गणना में वे सीमांत किसान शामिल नहीं थे, जिन्होंने साल में छह महीने से कम काम किया था. उनमें 56.13 लाख किसान सरकारी रिकार्ड में हैं. दूसरे शब्दों में वे या तो जमीन के मालिक हैं या बंटाईदार हैं. बाकी 73.51 लाख भूमिहीन किसान हैं. इस प्रकार किसानों का 53.7 प्रतिशत खेत मजदूर हैं. 1991 में खेत मजदूरों का प्रतिशत 46.11 प्रतिशत था एवं उनकी संख्या 54.82 लाख थी. इस प्रकार वाम मोरचा सरकार का कृषि विकास का दावा खुद ही खारिज हो जाता है. इसके अलावा ऐसे खेत मजदूरों को सामान्यत: साल में तीन महीने से अधिक भी काम नहीं मिलता है. विकास के इस तथाकथित पहिये ने गरीब किसानों को बुरी तरह बरबाद कि या है. 1971 में भूमिहीन खेत मजदूरों की संख्या 32.72 लाख थी. 1981 में 38.92 लाख एवं 1999 में यह बढ़ कर 50.55 लाख हो गयी. अभी बंगाल में भूमिहीन खेत मजदूर 73 लाख 18 हजार हैं. पश्चिम बंगाल में 26 साल के वाम मोरचा शासन काल के दौरान 1977-78 से 2003-04 के बीच अन्न उत्पादन 89.70 लाख टन से बढ़ कर 160 लाख टन हो गया-प्रतिवर्ष 2.3 प्रतिशत से भी कम वृद्धि दर पर. वाम मोरचा सरकार यह दावा करती है कि इसके शासन काल में पश्चिम बंगाल देश में पहले नंबर पर आ गया है. आंकड़े बताते हैं कि 2002-03 में पश्चिम बंगाल 144 लाख टन के साथ देश में चौथे नंबर पर था, (367 लाख टन के साथ उत्तरप्रदेश पहले नंबर पर था). राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (1999-2000) यह स्पष्ट करता है कि भारतीय गांवों में ग्रामीण आबादी का लगभग 27.1 प्रतिशत जीवनयापन करने योग्य स्तर से भी नीचे जी रहा था. पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से भी बदतर है-वह़ां 31.85 प्रतिशत लोग जीवनयापन योग्य स्तर से भी नीचे जी रहे हैं. सर्वेक्षण यह भी बताता है कि प्रति व्यक्ति ग्रामीण रोजगार की राष्ट्रीय दर 1.3 प्रतिशत के उलट पश्चिम बंगाल में यह सिर्फ 1.2 प्रतिशत थी. इस दौरान राज्य में प्रतिव्यक्ति खर्च 454 रुपये था, जबकि संपूर्ण भारत के लिए यह आंकड़ा 486 रुपये था. वाम मोरचे की सरकार का दावा है कि भूमि सुधार का फायदा लगभग 41 फीसदी ग्रामीणों को मिला है (25.44 पट्टेदार एवं 14.88 लाख पंजीकृत बंटाईदार). लेकि न राज्य के सर्वेक्षण पर एक स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार पट्टेदार एवं बंटाईदारों की जमीन में सिंचाई की उपलब्धता आधी जमीन में भी बहुत कम है. उनमें से एक बड़ा हिस्सा आवश्यक खाद का भी इस्तेमाल नहीं कर पाता. इनमें 10 से 15 प्रतिशत लोगों को ही प्राथमिक कृषि समितियों से ऋण मिलता है. छोटी जोत के कारण 90 फीसदी पट्टेदार व 83 प्रतिशत बंटाईदार काम के लिए दूसरे जगहों पर जाने को बाध्य होते हैं. उनमें से 60 प्रतिशत पट्टेदार एवं 52 प्रतिशत बंटाईदार साल में छह महीने कहीं दूसरी जगह काम करते हैं. ये आंकड़े बताते हैं बंगाल की वामपंथी सरकार झूठ के सहारे गढे गये विकास के मिथ की असलियत बताते हैं. अब भी यह सरकार सेज़ के लिए नये इलाकों की तलाश में है.

सुष्मिता गोस्वामी पटना विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की छात्रा हैं.

Entry Filed under: खबर पर नज़र. .

Leave a Comment

You must be logged in to post a comment.

Trackback this post  |  Subscribe to the comments via RSS Feed


RSS news from bbchindi.com

Recent Posts

Calendar

May 2007
M T W T F S S
« Apr    
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
28293031  

Links

Archives

Recent Comments

बंगाल म… on यह ठीक-ठीक ए…
क्रिके… on बंगाल में…
चन्द्र… on आइए, हम अंधे…
चन्द्र… on आइए, हम अंधे…
चन्द्र… on क्या पंत और …